Database Architecture :-

Information Technology में, डेटा Database Architecture नीतियों (policies), नियमों(rules) या मानकों (standards) से बना होता है जो कि यह नियंत्रित करता है कि Database में डाटा कैसे संग्रहित हो रहा है उस Data का किस प्रकार से उपयोग हो रहा है और उस Data को किस प्रकार से संभाला जा रहा है |

Data को वास्तव में bits , या संख्याओं और strings के रूप में संग्रहित किया जाता है, लेकिन इस स्तर पर डेटा के साथ काम करना मुश्किल है।

Database Architecture का उद्देश्य :-

  1. Database Architecture का उद्देश्य डेटाबेस के प्रत्येक Users ( उपयोगकर्ता ) को भौतिक रुप से Database का उपयोग करने से रोकता है किसी User को भौतिक रूप से Database का उपयोग करने से रोकने के कई सारे कारण है | जैसे कि जिस User को Database के जिस हिस्से का उपयोग करना है उस यूजर के समक्ष Database का वही हिस्सा प्रदर्शित हो और बाकी का डेटाबेस को वह यूजर Access ना कर पाएं जिससे डेटाबेस की सिक्योरिटी पर कोई खतरा पैदा ना हो जाए |
  2. दो अलग अलग यूजर एक ही डाटा को देखना चाहता है तो वह दोनों अलग-अलग उस एक ही डाटा को देख सकता है लेकिन लेकिन अगर वह दोनों डेटाबेस के दिखने के तरीके को बदलना चाहे तो बदल सकता है लेकिन इस बदलाव का असर सिर्फ उस यूजर के लिए हो डेटाबेस पर इस बदलाव का कोई असर ना हो |
  3. डेटाबेस का User सिर्फ इतना जानता है कि Database में क्या जानकारी उपलब्ध है लेकिन वह यह कभी भी नहीं जान पाए कि Database में वह जानकारी किस प्रकार से जमा की गई है |
  4. Database Administrator (DBA) उपयोगकर्ता को प्रभावित किए बिना डेटाबेस संग्रहण संरचनाओं (database storage structures) को बदलने में सक्षम होना चाहिए |

 

Database Architecture को दो प्रकारों में बांटा गया है।

Two-tier Client / Server architecture

Two-tier Client / Server architecture के दो मुख्य स्तर या परत हैं: –

  1. Client
  2. Server Database

 

Two-tier Client – Server architecture User और Server पर आधारित है। ग्राहक और सर्वर के बीच सीधे संचार होता है ग्राहक और सर्वर के बीच कोई मध्यवर्ती नहीं है | Two-tier architecture User इंटरफ़ेस क्लाइंट पर चलता है और Database Server पर संग्रहीत रहता है।

 

Three-Tier Client / Server architecture

American National Standards Institute (ANSI) या अमेरिकी राष्ट्रीय मानक संस्थान और Standards Planning and Requirements Committee (SPARC) ने 1975 में Database Architecture का उत्पादन किया। ANSI-SPARC ने Database के साथ तीन स्तर की दृष्टिकोण की आवश्यकता को पहचान लिया।

Three-Tier DBMS architecture के तीन स्तर या परत निम्न हैं: –

  • External Level (बाहरी स्तर)
  • Conceptual Level (संकल्पनात्मक स्तर)
  • Internal/ physical Level (आंतरिक/ भौतिक स्तर)


External Level (बाहरी स्तर):- यूज़र इस स्तर पर कार्य करते हैं और वे इस स्तर से परे डेटाबेस के किसी भी अस्तित्व के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। इस परत पर, डेटाबेस के कई आवेदन द्वारा Database में जमा डाटा को देख सकते है | User डाटाबेस को कैसे देकना चाहता है ये पूरी तरह से उसी पर निर्भर करता है पर यूजर को क्या क्या देखना है और क्या नहीं ये DBA तय करता है | User का इसपर कोई control नहीं होता है |

Conceptual Level (संकल्पनात्मक स्तर):- यह स्तर External Level और Internal Level के बीच में स्थित होता है | User Conceptual से परे डेटाबेस के किसी भी अस्तित्व से अनजान हैं। दूसरे छोर पर, Internal Level किसी भी उपयोगकर्ता के बारे में जानकारी से अनजान हैं। इसलिए, Conceptual Level मध्य में बैठता है और External Level और Internal/ physical Level के मध्य मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है।

Internal/ physical Level (आंतरिक/ भौतिक स्तर):– इस परत में वास्तविक डाटाबेस तस्वीर में आता है। पूरी डेटाबेस इसी स्तर पर physical जमा होती है |